Dahibari Coal Washery Movement : नौवें दिन जूस पिलाकर खत्म हुई भूख हड़ताल, मजदूरों की लड़ाई अभी जारी
Dahibari Coal Washery Movement : दहीबाड़ी कोल वाशरी में मजदूरों का नौ दिनों से जारी आमरण अनशन फिलहाल समाप्त, 26 सितंबर की बैठक पर टिकी उम्मीदें; मांगें नहीं मानी गईं तो फिर आंदोलन की चेतावनी
Dahibari Coal Washery Movement : धनबाद के निरसा क्षेत्र स्थित दहीबाड़ी कोल वाशरी में मजदूरों के हक और अपनी मांगों को लेकर चल रहा आमरण भूख हड़ताल आंदोलन नौवें दिन फिलहाल समाप्त हो गया। बीसीसीएल के एजीएम धर्मेंद्र तिवारी ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अनशनकारियों को जूस पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई। हालांकि, मजदूरों की मांगों पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। अब 26 सितंबर को प्रस्तावित बैठक को आंदोलन के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Dahibari Coal Washery Movement : दहीबाड़ी कोल वाशरी में मजदूरों के अधिकार और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले नौ दिनों से जारी आमरण भूख हड़ताल आखिरकार फिलहाल समाप्त हो गई। लगातार नौ दिनों तक बिना अन्न ग्रहण किए आंदोलन पर बैठे मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर मजबूती से आवाज उठाई। आंदोलन के दौरान अनशनकारियों की तबीयत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन से पीछे हटने से इनकार किया।
नौवें दिन आंदोलन स्थल पर उस समय स्थिति गंभीर हो गई, जब भूख हड़ताल पर बैठे बैद्यनाथ रविदास की तबीयत काफी बिगड़ने की बात सामने आई। आंदोलनकारियों के अनुसार, उनकी स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि उनके मुंह और नाक से खून तक आने लगा था। स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद मजदूरों की मांगों को लेकर आंदोलन जारी रहा।
हालात को देखते हुए आखिरकार बीसीसीएल के एजीएम धर्मेंद्र तिवारी आंदोलन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों से बातचीत की और जूस पिलाकर आमरण भूख हड़ताल समाप्त कराई। इसके साथ ही नौ दिनों से चल रहे अनशन को फिलहाल विराम मिल गया।
आंदोलन की समाप्ति के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नौ दिनों तक चली मजदूरों की लड़ाई भी खत्म हो गई है? आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि ऐसा नहीं है। आमरण भूख हड़ताल भले ही समाप्त हो गई हो, लेकिन मजदूरों की मांगों पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।
यही कारण है कि अब सभी की नजरें 26 सितंबर को प्रस्तावित बैठक पर टिकी हैं। जानकारी के अनुसार, विधायक की मौजूदगी में होने वाली इस बैठक में मजदूरों की मांगों पर चर्चा की जाएगी और उचित निर्णय लेने को लेकर विचार-विमर्श किया जाएगा।
आंदोलनकारियों के लिए यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि नौ दिनों तक चले संघर्ष के बाद अब वे अपनी मांगों के समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं। दूसरी ओर, प्रबंधन और मजदूर पक्ष के बीच होने वाली बातचीत से यह स्पष्ट होगा कि आगे की स्थिति किस दिशा में जाती है।
माले नेता अभय सिंह ने भी आंदोलन के मौजूदा हालात को देखते हुए आमरण भूख हड़ताल समाप्त करने के फैसले को लेकर अपनी बात रखी। उनके अनुसार, आंदोलनकारियों की लगातार बिगड़ती तबीयत और परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल आमरण अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
बताया गया कि विधायक की ओर से भी आंदोलनकारियों से फिलहाल आंदोलन को टालने की अपील की गई थी। इसके बाद बातचीत और आगामी बैठक की उम्मीद के बीच नौ दिनों से जारी भूख हड़ताल को समाप्त करने पर सहमति बनी।
हालांकि, आंदोलनकारियों की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि अनशन खत्म होने का मतलब मांगों से पीछे हटना नहीं है। फिलहाल इसे संघर्ष के एक चरण का अंत माना जा रहा है, न कि पूरी लड़ाई का।
अब 26 सितंबर की प्रस्तावित बैठक को दहीबाड़ी कोल वाशरी आंदोलन का अगला निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है। बैठक में मजदूरों की मांगों पर किस स्तर तक सहमति बनती है और प्रबंधन की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।
मजदूर पक्ष को उम्मीद है कि बैठक के जरिए उनकी समस्याओं का समाधान निकलेगा और लंबे समय से उठाई जा रही मांगों पर ठोस फैसला होगा। वहीं, यदि बैठक में उनकी मांगों को लेकर कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकलता है, तो आंदोलन दोबारा शुरू होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
माले नेता अभय सिंह ने मांगों पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में फिर से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। ऐसे में आने वाले दिन दहीबाड़ी कोल वाशरी के मजदूरों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
दहीबाड़ी कोल वाशरी में नौ दिनों तक चले इस आंदोलन ने मजदूरों की समस्याओं और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर सामने ला दिया है। आमरण भूख हड़ताल के दौरान आंदोलनकारियों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद रखी।
फिलहाल जूस पिलाए जाने के साथ आमरण भूख हड़ताल समाप्त हो गई है और आंदोलन स्थल पर संघर्ष का यह चरण थम गया है। लेकिन मजदूरों की मांगों पर अंतिम निर्णय नहीं होने के कारण स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा सकती।
अब असली तस्वीर 26 सितंबर की बैठक के बाद ही साफ होगी। यदि बैठक में मजदूरों की मांगों पर सहमति बनती है तो यह आंदोलन समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकता है। लेकिन अगर बातचीत बेनतीजा रहती है, तो एक बार फिर दहीबाड़ी कोल वाशरी में आंदोलन की आवाज तेज हो सकती है।
यानी दहीबाड़ी में नौ दिनों की भूख हड़ताल पर फिलहाल ब्रेक जरूर लग गया है, लेकिन मजदूरों की लड़ाई पर अभी पूर्णविराम नहीं लगा है। अब 26 सितंबर की बैठक ही तय करेगी कि यह संघर्ष समाधान तक पहुंचेगा या फिर एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।