Dhanbad News : झारखंड बंद का धनबाद में असर, किसान चौक पर आंदोलनकारियों का प्रदर्शन
Dhanbad News : पेंशन और आश्रितों को चतुर्थ वर्गीय नौकरी की मांग, जगत महतो के नेतृत्व में किसान चौक पर सड़क पर बैठे आंदोलनकारी
Dhanbad News : झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष समिति के आह्वान पर बुधवार को बुलाए गए एकदिवसीय झारखंड बंद का असर धनबाद में भी देखने को मिला। बंद के दौरान बरवाअड्डा स्थित किसान चौक पर झारखंड आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन किया और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। आंदोलनकारियों ने सड़क पर बैठकर नारेबाजी की और सरकार से उनकी मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की।
पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत झारखंड आंदोलनकारी जगत महतो के नेतृत्व में आंदोलनकारी किसान चौक पर जुटे। आंदोलनकारियों ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने खास तौर पर झारखंड आंदोलनकारियों को छत्तीसगढ़ की तर्ज पर पेंशन देने और उनके आश्रितों को चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी की नौकरी देने की मांग उठाई।
झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष समिति की ओर से अपनी मांगों को लेकर राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया गया था। समिति का कहना है कि झारखंड राज्य के निर्माण आंदोलन में योगदान देने वाले आंदोलनकारियों और उनके परिवारों की मांगों को लंबे समय से उठाया जा रहा है। इसी क्रम में सरकार पर दबाव बनाने के लिए बंद और प्रदर्शन का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
धनबाद के बरवाअड्डा स्थित किसान चौक पर आंदोलनकारियों के सड़क पर बैठने के कारण कुछ समय के लिए क्षेत्र में गतिविधियां प्रभावित हुईं। प्रदर्शन में शामिल आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और सरकार से जल्द से जल्द ठोस निर्णय लेने की मांग की।

आंदोलनकारियों का कहना है कि झारखंड अलग राज्य के निर्माण के लिए जिन लोगों ने संघर्ष किया, उनके योगदान और उनके परिवारों के हितों को सरकार को गंभीरता से देखना चाहिए। उनके अनुसार, केवल सम्मान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे उन्हें सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
झारखंड आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में पेंशन का मुद्दा शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि आंदोलनकारियों को छत्तीसगढ़ की तर्ज पर पेंशन की सुविधा दी जाए। आंदोलनकारियों का तर्क है कि राज्य निर्माण आंदोलन में योगदान देने वाले लोगों के लिए आर्थिक सुरक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, कई आंदोलनकारी आज उम्रदराज हो चुके हैं और उनके सामने आर्थिक एवं सामाजिक चुनौतियां हैं। ऐसे में सरकार को उनकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए पेंशन से जुड़ी मांग पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
आंदोलनकारियों ने कहा कि झारखंड के गठन के पीछे लंबे संघर्ष का इतिहास रहा है। इस संघर्ष में शामिल लोगों के योगदान को देखते हुए उनके लिए सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
आंदोलनकारियों की दूसरी प्रमुख मांग उनके आश्रितों को चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी की नौकरी देने से जुड़ी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिन आंदोलनकारियों ने राज्य निर्माण के लिए संघर्ष किया, उनके परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार को उनके आश्रितों के लिए रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए।
किसान चौक पर प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने इसी मांग को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि आश्रितों को रोजगार मिलने से परिवारों को आर्थिक सहारा मिल सकेगा। समिति की ओर से सरकार से मांग की गई कि इस विषय में स्पष्ट नीति बनाकर पात्र आंदोलनकारियों के आश्रितों को लाभ दिया जाए।
बरवाअड्डा के किसान चौक पर आयोजित प्रदर्शन का नेतृत्व झारखंड आंदोलनकारी जगत महतो ने किया। उनके नेतृत्व में आंदोलनकारी सड़क पर बैठे और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने कहा कि उनकी मांगें नई नहीं हैं और लंबे समय से सरकार के समक्ष उठाई जाती रही हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार को इस मामले में सिर्फ आश्वासन देने के बजाय ठोस पहल करनी चाहिए।
आंदोलनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सरकार तक अपनी बात पहुंचाना है। समिति की ओर से आयोजित बंद को इसी दबाव की प्रक्रिया के तौर पर देखा गया, जिसके माध्यम से सरकार का ध्यान आंदोलनकारियों की लंबित मांगों की ओर आकर्षित किया गया।
प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की कि झारखंड आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों से जुड़े मुद्दों पर जल्द निर्णय लिया जाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से मांगें उठाए जाने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं हुआ है।
उनका कहना है कि राज्य सरकार को आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं और मांगों को समझना चाहिए। साथ ही, पात्रता और नियमों को स्पष्ट करते हुए पेंशन तथा आश्रितों को रोजगार देने के मुद्दे पर आगे की प्रक्रिया तय की जानी चाहिए।
झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष समिति के आह्वान पर आयोजित इस बंद के पीछे मुख्य रूप से आंदोलनकारियों के सामाजिक और आर्थिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि झारखंड आंदोलनकारियों को पेंशन की सुविधा मिले और उनके आश्रितों को चतुर्थ वर्गीय पदों पर नौकरी का अवसर दिया जाए।
धनबाद में किसान चौक पर हुआ प्रदर्शन इसी व्यापक मांग का हिस्सा रहा। आंदोलनकारियों ने सड़क पर बैठकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को दोहराया।
फिलहाल, किसान चौक पर प्रदर्शन के कारण इलाके में गतिविधियां प्रभावित हुईं। आंदोलनकारियों ने सरकार से जल्द पहल करने की मांग करते हुए कहा कि उनकी समस्याओं का समाधान बातचीत और ठोस निर्णय के जरिए किया जाना चाहिए।
झारखंड बंद के दौरान धनबाद में सामने आया यह प्रदर्शन एक बार फिर झारखंड आंदोलनकारियों की लंबित मांगों को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में लेकर आया है। अब देखना होगा कि सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है और आंदोलनकारियों के साथ आगे किस स्तर पर बातचीत होती है।