Dhanbad News : MPL गेट पर भाकपा माले का अनिश्चितकालीन धरना, हाइवा परिचालन ठप; विधायक अरूप चटर्जी ने प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
Dhanbad News : निरसा में स्थानीय लोगों और विस्थापितों की मांगों को लेकर आंदोलन, रोजगार और CSR कार्यों को लेकर प्रबंधन पर उठाए सवाल; मांगें पूरी होने तक धरना जारी रखने की चेतावनी
Dhanbad News : धनबाद के निरसा में MPL प्रबंधन के खिलाफ भाकपा माले ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। स्थानीय विस्थापितों और पार्टी कार्यकर्ताओं के आंदोलन के कारण हाइवा परिचालन प्रभावित हुआ। निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने MPL प्रबंधन पर स्थानीय लोगों की अनदेखी, CSR कार्यों में अपेक्षित पहल नहीं करने और रोजगार संबंधी आश्वासन पूरा नहीं करने का आरोप लगाया।
Dhanbad News : धनबाद जिले के निरसा में मैथन पावर लिमिटेड यानी MPL प्रबंधन के खिलाफ भाकपा माले ने मोर्चा खोल दिया है। विभिन्न स्थानीय मांगों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और क्षेत्र के विस्थापितों ने MPL के मुख्य गेट के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। सोमवार सुबह से ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय लोग कंपनी के मुख्य गेट के पास जुटने लगे। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और प्रबंधन से तत्काल सकारात्मक पहल करने की मांग रखी।
आंदोलन के चलते MPL में हाइवा परिचालन प्रभावित होकर ठप हो गया, जिससे कंपनी की ट्रांसपोर्टिंग और सामान्य गतिविधियों पर असर पड़ने की बात सामने आई है। आंदोलनकारियों ने कंपनी के मुख्य गेट पर पार्टी का झंडा भी लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से स्थानीय लोगों और विस्थापित परिवारों से जुड़ी मांगों को लेकर आवाज उठाई जा रही है, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हुआ।

भाकपा माले के अनुसार, आंदोलन के पीछे स्थानीय लोगों और विस्थापितों से जुड़ी कई मांगें हैं। इनमें रोजगार, स्थानीय क्षेत्र के विकास, CSR के तहत कार्य और कंपनी की गतिविधियों से प्रभावित लोगों से जुड़े मुद्दे प्रमुख बताए जा रहे हैं।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि कंपनी के संचालन से क्षेत्र को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन स्थानीय स्तर पर विकास और रोजगार के मामले में अपेक्षित लाभ लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। इसी को लेकर पार्टी ने प्रबंधन के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का निर्णय लिया।
हालांकि, इन आरोपों पर MPL प्रबंधन की ओर से इस खबर के समय तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आंदोलनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों को उनके पक्ष के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
धरने का सीधा असर MPL की ट्रांसपोर्टिंग व्यवस्था पर पड़ा। कंपनी के मुख्य गेट के बाहर आंदोलन के कारण हाइवा वाहनों का परिचालन रुक गया। इससे कोयला, फ्लाई ऐश और अन्य सामग्री की आवाजाही प्रभावित होने की स्थिति बनी।
इससे पहले भी MPL से जुड़े आंदोलनों में हाइवा और अन्य वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की खबरें सामने आती रही हैं। अगस्त 2025 में भी MPL के मुख्य गेट पर कामगार यूनियन और हाइवा परिवहन से जुड़े लोगों ने मांगों को लेकर धरना दिया था, जिसके दौरान कोयला, फ्लाई ऐश और अन्य सामग्री की ट्रांसपोर्टिंग प्रभावित हुई थी।
निरसा क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही पहले से ही स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय रही है। हाल के एक सड़क हादसे के बाद भी MPL से जुड़ी कोयला और फ्लाई ऐश ट्रांसपोर्टिंग को लेकर स्थानीय लोगों ने वैकल्पिक मार्ग और सड़क व्यवस्था से संबंधित मांगें उठाई थीं।
आंदोलन के बीच निरसा विधायक अरूप चटर्जी भी धरनास्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। उन्होंने MPL प्रबंधन पर स्थानीय लोगों और विस्थापितों की मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
विधायक के मुताबिक, कंपनी के संचालन से प्रभावित क्षेत्र में स्थानीय लोगों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को रोजगार देने और क्षेत्र के विकास के लिए कंपनी की ओर से जो अपेक्षाएं हैं, उन्हें पूरा किया जाना जरूरी है।
अरूप चटर्जी ने विशेष रूप से CSR यानी कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत किए जाने वाले कार्यों को लेकर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि क्षेत्र में CSR के तहत अपेक्षित स्तर पर काम नहीं हो रहा है।
विधायक ने यह भी कहा कि इससे पहले भरोसे और आश्वासन के आधार पर आंदोलन समाप्त किया गया था, लेकिन बाद में मांगों को लेकर ठोस पहल नहीं हुई। उनके अनुसार, इसी वजह से एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
निरसा क्षेत्र में उद्योग और स्थानीय रोजगार का मुद्दा लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। MPL जैसी औद्योगिक परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को रोजगार और क्षेत्रीय विकास का लाभ मिलने की उम्मीद रहती है। आंदोलनकारियों का कहना है कि स्थानीय युवाओं और विस्थापित परिवारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।
भाकपा माले ने प्रबंधन से मांग की है कि स्थानीय लोगों और विस्थापितों से जुड़े रोजगार के मुद्दे पर स्पष्ट नीति और ठोस पहल की जाए। पार्टी का कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि मांगों पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करनी होगी।
MPL को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन ने एक बार फिर औद्योगिक परियोजनाओं और स्थानीय लोगों के हितों के बीच संतुलन के सवाल को सामने ला दिया है। किसी भी औद्योगिक परियोजना से क्षेत्र में रोजगार, आर्थिक गतिविधियों और आधारभूत संरचना को बढ़ावा मिलने की उम्मीद रहती है, लेकिन साथ ही स्थानीय समुदायों की समस्याओं और विस्थापन से जुड़े मुद्दों का समाधान भी जरूरी माना जाता है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि विकास का लाभ स्थानीय आबादी तक पहुंचना चाहिए। वहीं, कंपनी के संचालन और ट्रांसपोर्टिंग से जुड़ी गतिविधियों का असर स्थानीय सड़कों और यातायात पर पड़ता है, इसलिए क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं को भी मजबूत किए जाने की जरूरत है।
भाकपा माले ने साफ कर दिया है कि जब तक MPL प्रबंधन की ओर से उनकी मांगों पर सकारात्मक और ठोस पहल नहीं होती, तब तक मुख्य गेट के बाहर अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।
आंदोलनकारियों ने प्रबंधन से बातचीत कर समाधान निकालने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि MPL प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत कब शुरू होती है और क्या किसी सहमति के जरिए हाइवा परिचालन दोबारा शुरू कराया जा सकता है।