Dhanbad News : धनबाद में साइबर अपराधियों के खिलाफ ‘साइबर शील्ड’ का बड़ा एक्शन, 5 गिरफ्तार; 20 मोबाइल और 3 लैपटॉप बरामद
Dhanbad News : टुंडी के भालपहाड़ी गांव में पुलिस की विशेष छापेमारी, 23 बैंक पासबुक, 16 एटीएम कार्ड, 10 चेकबुक और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त; अभियान में 17 पुलिस पदाधिकारी और 80 जवान रहे शामिल।
Dhanbad News : धनबाद में साइबर अपराध के खिलाफ ‘साइबर शील्ड’ अभियान में पुलिस ने टुंडी के भालपहाड़ी गांव से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। छापेमारी में 20 मोबाइल, 3 लैपटॉप, 23 बैंक पासबुक, 16 एटीएम कार्ड और कई दस्तावेज बरामद हुए।
Dhanbad News : धनबाद जिले में बढ़ती साइबर अपराध की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने ‘साइबर शील्ड’ नाम से विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत धनबाद पुलिस को बड़ी सफलता मिलने का दावा किया गया है। ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब के नेतृत्व में गठित विशेष छापामारी दल ने टुंडी थाना क्षेत्र के भालपहाड़ी गांव में छापेमारी कर पांच कथित साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस की इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। बरामद सामान में 20 मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, 23 बैंक पासबुक, 16 एटीएम कार्ड और विभिन्न बैंकों के 10 चेकबुक शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस ने आधार कार्ड, पैन कार्ड, ई-पॉस मशीन और अन्य दस्तावेज भी जब्त किए हैं।
इस कार्रवाई को जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। हालांकि, गिरफ्तार आरोपियों की कथित भूमिका और बरामद दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित सभी पहलुओं की जांच पुलिस की ओर से की जानी है।
धनबाद के ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले में पिछले कुछ दिनों से साइबर अपराध से जुड़ी घटनाओं की सूचनाएं मिल रही थीं। इन घटनाओं पर रोक लगाने और अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर ‘साइबर शील्ड’ नामक मेगा ऑपरेशन शुरू किया गया।
इसी अभियान के दौरान 14 अक्टूबर 2026 को पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि टुंडी थाना क्षेत्र के भालपहाड़ी गांव में कुछ संदिग्ध लोग कथित तौर पर साइबर अपराध से जुड़ी गतिविधियों में शामिल हैं और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में हैं।
सूचना की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण एसपी के नेतृत्व में विशेष छापामारी दल का गठन किया गया। इसके बाद पुलिस टीम ने भालपहाड़ी गांव में अभियान चलाया। इस विशेष कार्रवाई में 17 पुलिस पदाधिकारियों के साथ 80 महिला और पुरुष पुलिसकर्मी शामिल थे।
पुलिस ने छापेमारी के दौरान पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके पास से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तथा बैंकिंग दस्तावेजों को जब्त किया। मामले में आगे की जांच के लिए बरामद सामान को महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर देखा जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों में तीन धनबाद जिले के टुंडी थाना क्षेत्र के भालपहाड़ी गांव के निवासी हैं। अन्य दो आरोपी अलग-अलग जिलों के रहने वाले बताए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
- राजू कुमार मंडल — भालपहाड़ी, टुंडी, धनबाद।
- उत्तम कुमार मंडल — भालपहाड़ी, टुंडी, धनबाद।
- अजीत कुमार मंडल — भालपहाड़ी, टुंडी, धनबाद।
- दिलीप कुमार मंडल — देवघर जिला।
- उमेश कुमार राणा — कोडरमा जिला।
पुलिस ने इन पांचों को साइबर अपराध से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया है। हालांकि, किसी भी आरोपी की दोषसिद्धि का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।
छापेमारी के दौरान पुलिस को बड़ी संख्या में मोबाइल फोन और बैंकिंग से संबंधित दस्तावेज मिले हैं। जब्त सामान की सूची में कई ऐसे उपकरण और दस्तावेज शामिल हैं, जिनकी जांच से कथित साइबर गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलने की संभावना है।
पुलिस के अनुसार, बरामद सामान में शामिल हैं:
- तीन लैपटॉप।
- 20 स्मार्टफोन और कीपैड मोबाइल फोन, जिनमें चार आईफोन भी शामिल हैं।
- 16 एटीएम कार्ड।
- चार पैन कार्ड।
- चार आधार कार्ड।
- 23 बैंक पासबुक।
- विभिन्न बैंकों के 10 चेकबुक।
- एक ई-पॉस मशीन।
- तीन आरसी बुक।
- एक ग्रीन रेमिट कार्ड।
- अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज।
इतनी बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेजों और मोबाइल फोन की बरामदगी के बाद अब इनकी जांच महत्वपूर्ण हो गई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि इन उपकरणों और दस्तावेजों का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया, बैंक खातों से जुड़े लेन-देन का स्वरूप क्या था और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं।
हालांकि, बरामद वस्तुओं की मौजूदगी अपने आप में किसी व्यक्ति के अपराधी होने का अंतिम प्रमाण नहीं है। इनकी वास्तविक भूमिका जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान स्पष्ट होगी।
इस मामले में टुंडी थाना कांड संख्या 77/26 के तहत 15 अक्टूबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार, मामला भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की धारा 66(C) तथा 66(D) के तहत दर्ज किया गया है।
आईटी एक्ट की धारा 66C मुख्य रूप से पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी, जैसे किसी अन्य व्यक्ति के इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर, पासवर्ड या विशिष्ट पहचान का बेईमानी से इस्तेमाल करने से संबंधित है। वहीं, धारा 66D कंप्यूटर संसाधनों या संचार उपकरणों के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण कर धोखाधड़ी करने से संबंधित है।
इन धाराओं के तहत दर्ज मामले में पुलिस को आरोपों के समर्थन में साक्ष्य जुटाने होंगे। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की जांच आगे की कार्रवाई में अहम भूमिका निभा सकती है।
डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध की घटनाएं आम लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। फर्जी कॉल, पहचान का दुरुपयोग, ऑनलाइन ठगी और बैंकिंग से जुड़ी धोखाधड़ी के मामलों में लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ऐसे में पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ आम लोगों की जागरूकता भी जरूरी है। नागरिकों को किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, एटीएम पिन, बैंकिंग पासवर्ड या संवेदनशील दस्तावेज साझा नहीं करने चाहिए। किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन-शेयरिंग एप डाउनलोड करने से भी बचना चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो उसे जल्द से जल्द राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करनी चाहिए और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी रिपोर्ट दर्ज करनी चाहिए। समय पर शिकायत करने से संदिग्ध लेन-देन पर कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
धनबाद पुलिस का कहना है कि ‘साइबर शील्ड’ अभियान के तहत साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए कार्रवाई जारी है। भालपहाड़ी गांव में की गई इस छापेमारी के बाद अब मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ, बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच और बैंकिंग दस्तावेजों के सत्यापन जैसे पहलू महत्वपूर्ण होंगे।
पुलिस की इस कार्रवाई से साइबर अपराध के खिलाफ अभियान को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही, यह देखना भी अहम होगा कि जांच में कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, संदिग्ध लेन-देन और संभावित पीड़ितों के बारे में क्या जानकारी सामने आती है।