Giridih News : गिरिडीह के माथाडीह में Working Women Hostel का विरोध, दलित-आदिवासी रैयतों ने जमीन पर उठाए सवाल
Giridih News ; वार्ड नंबर 21 के माथाडीह मौजा में प्रस्तावित 2.33 एकड़ जमीन पर हॉस्टल निर्माण को लेकर विवाद, रैयतों ने उपायुक्त से जांच और वैकल्पिक जमीन की मांग की
Giridih News : गिरिडीह के माथाडीह में प्रस्तावित Working Women Hostel को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध सामने आया है। दलित-आदिवासी रैयतों ने प्रस्तावित निर्माण के लिए चिन्हित 2.33 एकड़ जमीन को लेकर सवाल उठाते हुए प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। रैयतों का कहना है कि वे लंबे समय से इस जमीन पर निर्भर हैं और उन्हें जमीन का मुआवजा नहीं मिला है। स्थानीय लोगों ने हॉस्टल निर्माण के लिए वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने की मांग की है।
Giridih News : गिरिडीह नगर क्षेत्र के वार्ड नंबर 21 स्थित माथाडीह मौजा में प्रस्तावित Working Women Hostel को लेकर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। महिला कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित इस हॉस्टल के निर्माण को लेकर स्थानीय दलित और आदिवासी रैयतों ने आपत्ति जताई है।
स्थानीय रैयतों के अनुसार, हॉस्टल निर्माण के लिए जिस करीब 2.33 एकड़ जमीन को चिन्हित किया गया है, उस जमीन से उनका लंबे समय से जुड़ाव रहा है। उनका दावा है कि वे इस जमीन पर अपनी आजीविका और अन्य जरूरतों के लिए निर्भर रहे हैं। ऐसे में निर्माण कार्य के लिए जमीन के इस्तेमाल को लेकर उनके बीच चिंता पैदा हुई है।
विरोध कर रहे स्थानीय लोगों ने जमीन के बदले मुआवजे को लेकर भी सवाल उठाए हैं। रैयतों का कहना है कि यदि जमीन का अधिग्रहण या किसी सरकारी परियोजना के लिए उपयोग किया जा रहा है, तो प्रभावित लोगों के अधिकारों और मुआवजे से जुड़े मामलों को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों की मुख्य मांग है कि प्रशासन पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करे और जमीन की स्थिति, रैयतों के अधिकार तथा मुआवजे से जुड़े पहलुओं को स्पष्ट करे। इसके बाद ही निर्माण को लेकर आगे की प्रक्रिया की जाए।
रैयतों ने गिरिडीह उपायुक्त से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि Working Women Hostel जैसी सुविधा का निर्माण जरूरी हो सकता है, लेकिन इसके लिए ऐसी जमीन का चयन किया जाना चाहिए जिससे स्थानीय रैयतों के हित प्रभावित न हों।
इसी को लेकर लोगों ने हॉस्टल निर्माण के लिए वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने की मांग रखी है। उनका कहना है कि यदि दूसरी जगह जमीन उपलब्ध कराई जाती है तो विकास कार्य भी आगे बढ़ सकता है और स्थानीय लोगों के जमीन संबंधी हितों पर भी विवाद की स्थिति नहीं बनेगी।
पूर्व जिला परिषद सदस्य एवं ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के जिला संयोजक राजेश यादव ने भी स्थानीय लोगों की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने मामले को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से उठाने की अपील की।
इस पूरे मामले में अब स्थानीय रैयतों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। सवाल यह भी है कि क्या प्रशासन प्रस्तावित जमीन की वास्तविक स्थिति और रैयतों के दावों की जांच करेगा? साथ ही, क्या Working Women Hostel के लिए किसी दूसरी जमीन का विकल्प तलाशा जाएगा?