Dhanbad News : धनबाद के बैंक मोड़ ओवरब्रिज पर अवैध वसूली का आरोप, SSP के नाम से चिपका पोस्टर वायरल
Dhanbad News : थाना से चंद कदम की दूरी पर रात 2 बजे से सुबह 8 बजे तक कथित वसूली का दावा, पोस्टर में कथित पत्रकार गोलू सिंह और पवन सिंह के नाम का उल्लेख; तस्वीरों को साक्ष्य बताकर निष्पक्ष जांच की मांग।
Dhanbad News : धनबाद के बैंक मोड़ थाना के सामने ओवरब्रिज पर अवैध वसूली के आरोप वाला पोस्टर वायरल हुआ है। पोस्टर में रात के समय कोयला और बालू वाहनों से वसूली का दावा करते हुए कथित पत्रकार गोलू सिंह और पवन सिंह का नाम लिया गया है। पुलिस जांच और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
Dhanbad News : झारखंड के धनबाद जिले में अवैध कोयला कारोबार और उससे जुड़ी गतिविधियों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। इस बार मामला बैंक मोड़ थाना क्षेत्र के ओवरब्रिज से जुड़ा है, जहां कथित अवैध वसूली के आरोपों वाला एक पोस्टर सामने आने के बाद शहर में चर्चा तेज हो गई है। खास बात यह है कि यह पोस्टर बैंक मोड़ थाना के सामने स्थित ओवरब्रिज की रेलिंग पर चिपकाया गया है। पोस्टर को SSP धनबाद के नाम संबोधित किया गया है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वायरल पोस्टर में रात के अंधेरे में कोयला ढोने वाले बाइक और साइकिल सवारों के साथ-साथ बालू लदे वाहनों से कथित तौर पर अवैध वसूली किए जाने का आरोप लगाया गया है। पोस्टर में इस गतिविधि को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। हालांकि, पोस्टर में लगाए गए आरोपों की अब तक किसी आधिकारिक स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है।
पोस्टर में दावा किया गया है कि बैंक मोड़ ओवरब्रिज के आसपास प्रतिदिन रात करीब 2 बजे से सुबह 8 बजे तक कथित अवैध वसूली की गतिविधियां संचालित होती हैं। आरोप के मुताबिक, इस दौरान बाइक और साइकिल से कोयला ढोने वाले लोगों को निशाना बनाया जाता है। इसके अलावा बालू लदे वाहनों से भी कथित तौर पर पैसे वसूले जाने की बात कही गई है।
पोस्टर में इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए SSP धनबाद से शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि ओवरब्रिज के आसपास रात के समय होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जाए और यदि वसूली की बात सही पाई जाती है तो इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि थाना से महज कुछ कदम की दूरी पर इस तरह की गतिविधियां हो रही हैं, तो उनकी निगरानी और रोकथाम की जिम्मेदारी किसकी है? हालांकि, केवल पोस्टर में लगाए गए आरोपों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। वास्तविक स्थिति पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
वायरल पोस्टर में कथित पत्रकार गोलू सिंह और पवन सिंह का नाम भी सामने आया है। पोस्टर में दोनों पर असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर कथित अवैध वसूली करने का आरोप लगाया गया है। इतना ही नहीं, पोस्टर के नीचे तीन तस्वीरें भी लगाई गई हैं, जिन्हें शिकायतकर्ता की ओर से कथित गतिविधियों के साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया है।
हालांकि, इन तस्वीरों में दिखाई देने वाली गतिविधियों, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और आरोपों की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि तस्वीरें कब और किन परिस्थितियों में ली गई थीं। इसलिए किसी भी व्यक्ति को आरोपों के आधार पर दोषी मानना उचित नहीं होगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जरूरी है कि पुलिस प्रशासन पोस्टर में लगाए गए आरोपों की जांच करे। तस्वीरों की सत्यता, उनकी पृष्ठभूमि और कथित घटनाओं से उनके संबंध की भी जांच की जानी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति की छवि प्रभावित न हो और यदि कोई दोषी है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सके।
वायरल पोस्टर में केवल कथित अवैध वसूली का मुद्दा ही नहीं उठाया गया है, बल्कि सुबह के समय ओवरब्रिज के आसपास आने-जाने वाले आम लोगों की परेशानी का भी उल्लेख किया गया है।
पोस्टर में दावा किया गया है कि सुबह के समय कई अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए इस रास्ते से गुजरते हैं। ऐसे में यदि ओवरब्रिज के आसपास कथित वसूली या असामाजिक गतिविधियां होती हैं, तो इससे आम लोगों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों की ओर से भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग किए जाने की बात सामने आई है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक रास्तों पर किसी भी तरह की अवैध गतिविधि या आम नागरिकों को परेशान करने की शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
बैंक मोड़ थाना के सामने स्थित ओवरब्रिज पर इस तरह का पोस्टर सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि पोस्टर में लगाए गए आरोप सही हैं, तो यह निश्चित रूप से गंभीर मामला हो सकता है। वहीं, यदि आरोप गलत या भ्रामक पाए जाते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी होगा।
ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। पुलिस को यह पता लगाना चाहिए कि पोस्टर किसने लगाया, उसमें लगाए गए आरोपों का आधार क्या है और जिन तस्वीरों को साक्ष्य बताया जा रहा है, उनकी वास्तविकता क्या है। साथ ही, संबंधित स्थान पर रात के समय निगरानी और जांच की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
धनबाद में कोयला और बालू से जुड़ी गतिविधियां पहले भी अलग-अलग कारणों से चर्चा में रही हैं। ऐसे में किसी भी तरह की अवैध वसूली की शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह शिकायतों की जांच करे और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करे।