landslide in Dhanbad : महेशपुर कोलियरी में 50 फीट के दायरे में धंसी जमीन, ओबी डंप धंसने से मचा हड़कंप
landslide in Dhanbad : घनी आबादी के पास भूधंसान से ग्रामीणों में दहशत, बीसीसीएल प्रबंधन के खिलाफ बढ़ा आक्रोश
landslide in Dhanbad : कोयलांचल धनबाद में भूधंसान और गोफ बनने की घटनाओं ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर बाघमारा क्षेत्र में बीसीसीएल की कोलियरियों के आसपास जमीन धंसने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बीते कुछ महीनों में अलग-अलग इलाकों में हुए भूधंसान के बाद अब महेशपुर कोलियरी क्षेत्र में जमीन धंसने की घटना ने स्थानीय ग्रामीणों को चिंता में डाल दिया है।
landslide in Dhanbad : ताजा मामला बीसीसीएल एरिया-3 के महेशपुर कोलियरी गोविंदपुर क्षेत्र का है। यहां श्री इंफ्रा आउटसोर्सिंग कंपनी के ओबी डंप परिसर में अचानक जमीन धंस गई। बताया जा रहा है कि करीब 50 फीट के दायरे में जमीन धंसने से मौके पर हड़कंप मच गया। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई।
हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। लेकिन जिस स्थान पर भूधंसान हुआ है, उसके आसपास आबादी होने के कारण स्थानीय लोगों की चिंता काफी बढ़ गई है।
भूधंसान की घटना सामने आने के बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संबंधित स्थल पर ओबी डंपिंग का काम तत्काल रोक दिया गया है। मौके की स्थिति को देखते हुए प्रबंधन की ओर से स्थिति की समीक्षा की जा रही है।
प्राथमिक तौर पर जमीन के नीचे मौजूद पुरानी अंडरग्राउंड माइंस और वर्तमान समय में आउटसोर्सिंग के माध्यम से डंप किए जा रहे भारी मात्रा में ओवरबर्डन यानी ओबी के दबाव को जमीन धंसने की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि भूधंसान की वास्तविक वजह क्या है, यह विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
कोयला खनन वाले इलाकों में भूमिगत खदानों के कारण जमीन की संरचना प्रभावित होने की आशंका रहती है। वहीं दूसरी ओर बड़े पैमाने पर ओबी डंपिंग होने से जमीन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसे में महेशपुर कोलियरी में हुई इस घटना ने खनन क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और डंपिंग प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
महेशपुर कोलियरी में भूधंसान की सबसे बड़ी चिंता यह है कि डंपिंग क्षेत्र के आसपास घनी आबादी मौजूद है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जमीन धंसने की घटनाएं इसी तरह होती रहीं तो भविष्य में बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर भी चिंता है कि जमीन के नीचे की स्थिति को लेकर पर्याप्त जानकारी और सुरक्षा उपायों के बिना यदि डंपिंग जारी रहती है तो आसपास रहने वाले लोगों की जान और संपत्ति पर खतरा पैदा हो सकता है।
स्थानीय ग्रामीण गोपाल बाउरी ने कहा कि भूधंसान की घटना के बाद लोगों में डर का माहौल है। ग्रामीणों की मांग है कि आबादी वाले इलाके के आसपास डंपिंग से पहले सुरक्षा मानकों का गंभीरता से पालन किया जाए और जमीन की स्थिति की जांच कराई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि खनन और डंपिंग से जुड़े कार्यों के कारण यदि क्षेत्र की जमीन लगातार कमजोर हो रही है, तो इसका स्थायी समाधान जरूरी है। केवल घटना के बाद कुछ समय के लिए काम रोक देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
भूधंसान की घटना के बाद स्थानीय लोगों में बीसीसीएल प्रबंधन के प्रति नाराजगी भी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है।
स्थानीय लोगों ने प्रबंधन से मांग की है कि डंपिंग क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। साथ ही आबादी वाले इलाके से पर्याप्त दूरी बनाए रखते हुए ही ओबी डंपिंग का काम किया जाए।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि केवल डंपिंग रोकने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जिस स्थान पर भूधंसान हुआ है, वहां जमीन के नीचे की स्थिति की तकनीकी जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही आसपास के क्षेत्र में भी संभावित खतरे वाले स्थानों की पहचान कर सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम किए जाने चाहिए।
महेशपुर कोलियरी के पीओ कामता सिंह ने घटना के संबंध में बताया कि भूधंसान वाले स्थान पर फिलहाल ओबी डंपिंग का काम रोक दिया गया है। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्थिति की समीक्षा की जा रही है।
प्रबंधन की ओर से यह भी देखा जा रहा है कि जमीन धंसने के पीछे वास्तविक कारण क्या रहा। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि घटना भूमिगत खनन गतिविधियों के कारण हुई या ओबी डंप के अत्यधिक दबाव की वजह से।
धनबाद कोयलांचल लंबे समय से भूमिगत कोयला खनन और उससे जुड़े भूधंसान की घटनाओं के लिए संवेदनशील माना जाता है। बाघमारा समेत कई कोयला क्षेत्रों में समय-समय पर जमीन धंसने और गोफ बनने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
इन घटनाओं के कारण खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। खासकर उन इलाकों में खतरा अधिक चिंता का विषय बन जाता है, जहां खदानों, ओबी डंप और रिहायशी बस्तियों के बीच दूरी कम है।
महेशपुर कोलियरी की ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में जमीन की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
फिलहाल महेशपुर कोलियरी में भूधंसान वाले इलाके में ओबी डंपिंग का काम रोक दिया गया है। प्रबंधन स्थिति की समीक्षा कर रहा है और जांच के बाद भूधंसान की वास्तविक वजह सामने आने की उम्मीद है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जमीन धंसने की वजह भूमिगत खदान है या भारी ओबी डंपिंग का दबाव? और इससे भी अहम सवाल यह है कि घनी आबादी के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
ग्रामीणों की मांग है कि मामले को केवल एक स्थानीय घटना मानकर नजरअंदाज न किया जाए। पूरे क्षेत्र का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए और भविष्य में भूधंसान जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए। क्योंकि कोयला उत्पादन और विकास जरूरी है, लेकिन उसके साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।