Dhanbad News : मंत्री योगेंद्र प्रसाद का केंद्र पर निशाना, बोले- झारखंड के अधिकारों से समझौता नहीं
Dhanbad News : 65 हजार करोड़ रुपये के बकाये का मुद्दा उठाया, MMDR कानून के प्रावधानों पर जताई आपत्ति; जरूरत पड़ी तो सड़क से सदन तक आंदोलन की चेतावनी
Dhanbad News : धनबाद में विनोद बिहारी महतो जयंती कार्यक्रम में पहुंचे पेयजल एवं उत्पाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने केंद्र-राज्य आर्थिक हिस्सेदारी, खनिज संसाधनों और पेयजल योजनाओं को लेकर सरकार का पक्ष रखा।
Dhanbad News : झारखंड के पेयजल एवं उत्पाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने धनबाद में केंद्र सरकार पर राज्य के आर्थिक हितों को प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए करीब 65 हजार करोड़ रुपये के बकाये का मुद्दा उठाया। उन्होंने MMDR कानून के प्रावधानों पर भी सवाल उठाए और कहा कि झारखंड के अधिकारों से समझौता स्वीकार नहीं होगा।
धनबाद में आयोजित स्वर्गीय विनोद बिहारी महतो की जयंती कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे झारखंड के पेयजल एवं उत्पाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने केंद्र और राज्य के बीच आर्थिक हिस्सेदारी को लेकर अपनी बात रखी। मंत्री ने कहा कि झारखंड के आर्थिक हितों और राज्य के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार लगातार केंद्र के सामने अपनी बात रख रही है।
योगेंद्र प्रसाद ने दावा किया कि झारखंड का करीब 65 हजार करोड़ रुपये बकाया है और इस राशि को लेकर राज्य सरकार की ओर से लगातार केंद्र से आग्रह किया जा रहा है। उनके मुताबिक मुख्यमंत्री समेत राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल इस मुद्दे को लेकर कई बार केंद्र के समक्ष अपनी बात रख चुके हैं।
मंत्री ने खान और खनिज से जुड़े MMDR कानून के प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों से जुड़े फैसलों का राज्य की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ता है, इसलिए राज्यों के अधिकारों और हितों का सम्मान किया जाना चाहिए।
झारखंड में MMDR कानून को लेकर राजनीतिक और नीतिगत बहस पहले से जारी है। हाल के दिनों में राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े नेताओं ने भी संशोधन के प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं, जबकि विपक्ष की ओर से इन आपत्तियों को अलग तरीके से देखा गया है।
योगेंद्र प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के राज्यों के खनिज अधिकारों से जुड़े फैसले का हवाला देते हुए कहा कि खनिज संपदा का लाभ राज्य और यहां के लोगों तक पहुंचना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि झारखंड की पहचान सिर्फ खनिज संपदा से नहीं, बल्कि जंगल, पहाड़ और नदियों से भी है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल होता है तो स्थानीय लोगों को उसका लाभ मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि खनिज संसाधन झारखंड के लिए बोझ नहीं, बल्कि विकास का माध्यम बनने चाहिए। मंत्री के मुताबिक राज्य के हितों को प्रभावित करने वाला कोई फैसला सामने आने पर सरकार लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखेगी और जरूरत पड़ने पर सड़क से सदन तक आंदोलन किया जा सकता है।
योगेंद्र प्रसाद ने पेयजल विभाग की योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य हर घर तक नल के माध्यम से सुरक्षित पानी पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि कई योजनाएं केंद्र और राज्य की साझेदारी से संचालित हो रही हैं।
मंत्री के अनुसार राज्य सरकार अपनी हिस्सेदारी खर्च कर चुकी है, लेकिन केंद्र से मिलने वाली राशि लंबित रहने के कारण कुछ योजनाओं की रफ्तार प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार अपने स्तर से वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार कर सकती है।
धनबाद में DMFT और नल-जल योजना से जुड़ी एजेंसियों के कामकाज को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने कहा कि यदि किसी एजेंसी के स्तर पर नियमों के खिलाफ काम या अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में विधि विभाग से राय ली जा रही है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने समेत अन्य कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सकता है।
मंत्री ने बताया कि उत्पाद विभाग ने पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 4,010 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया था। इस वित्तीय वर्ष में सरकार ने इसे बढ़ाकर करीब 5,000 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता, नियमों का पालन और सरकारी राशि का उचित इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
धनबाद दौरे के दौरान योगेंद्र प्रसाद ने एक साथ कई मुद्दों को सामने रखा। एक ओर उन्होंने केंद्र से कथित बकाये और MMDR कानून को लेकर राज्य के अधिकारों की बात कही, वहीं दूसरी ओर पेयजल योजनाओं, DMFT और उत्पाद विभाग के राजस्व लक्ष्य को सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़ा।
MMDR कानून को लेकर झारखंड में राजनीतिक विरोध और केंद्र-राज्य अधिकारों पर बहस सितंबर 2026 में भी जारी है।